Life style: बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण पर्यावरण पर गहरा संकट छा रहा है। इसके लिए मुख्य रूप से मनुष्य ही जिम्मेदार है, लेकिन आम इंसान अपनी लाइफस्टाइल में थोड़ा-सा परिवर्तन करके भी पर्यावरण को काफी हद तक बचा सकता है। यही बात आज सही साबित हो रही है।
इसी सोच के साथ नया शब्द ट्रेंड कर रहा है – सुस्टाइल
सुस्टाइल का मतलब है ऐसा फैशन जो पर्यावरण और नैतिकता के अनुकूल हो और हमें तथा हमारे समाज को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो। यही नए लाइफस्टाइल का फैशन है, जिसे सुस्टाइल कहा जाता है।
जैसा कि आप जानते हैं, आज फैशन केवल दिखावे या ट्रेंड का नाम नहीं रह गया है। यह अब हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है कि हम खुद को समाज में इस तरह प्रस्तुत करें कि एक जागरूकता भरा मैसेज भी लोगों तक पहुंचे। इसी जागरूकता भरे लाइफस्टाइल और फैशन को, जो पर्यावरण और नैतिकता को बचाता है, आज सुस्टाइल यानी Sustainable Style के नाम से हर जगह लोकप्रियता मिल रही है। पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए स्टाइलिश जीवन जीना ही अब फैशन का नया आधार साबित हो रहा है।
यह जीवन शैली का एक ऐसा नजरिया है जो पर्यावरण के अनुकूल और नैतिक रूप से सही है। हमारे पुरखे भी इसी तरह की जीवन शैली को अपनाकर पर्यावरण के साथ-साथ खुद पर भी विश्वास रखते थे। लेकिन जिंदगी की भाग-दौड़ और आधुनिक युग में प्रवेश करते ही मनुष्य का जीवन अपने लक्ष्य से भटक गया।
दरअसल इस फैशन स्टाइल में पर्यावरण और नैतिकता को ध्यान में रखकर व्यक्ति अपने कपड़े, एक्सेसरीज, पहनावे की वस्तुएं और खाने-पीने की चीजों का चयन करता है।
ऑर्गेनिक और रिसाइकल्ड मटेरियल
ऐसी वस्तुएं और प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें जो पूरी तरह ऑर्गेनिक हों, जिनमें किसी तरह का केमिकल या दूषित पदार्थ न हो। ऐसे ऑर्गेनिक फैशन वाले कपड़े, जूते और अन्य वस्तुएं हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। इनमें ऑर्गेनिक कॉटन, हेम्प, लिनन और रिसाइकल्ड पॉलिएस्टर शामिल हैं। लंबे समय तक चलने वाले कपड़े जैसे खादी भी इसी श्रेणी में आते हैं।
जब आप इस तरह के प्रोडक्ट पहनते हैं तो आपका इमेज एक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल व्यक्ति के रूप में बनता है। आजकल लोग यह भी देखते हैं कि कोई व्यक्ति कितना पर्यावरण के अनुकूल कार्य करता है और उसी के अनुसार उसके फैशन और पहनावे को आंकते हैं।
नैतिक रूप से उत्पादित वस्तुओं का फैशन एक जिम्मेदारी है
जब हम कोई प्रोडक्ट खरीदते हैं तो हमें यह भी सोचना चाहिए कि उसे बनाने वाले वर्कर को उचित मजदूरी मिली है या नहीं, क्या उसे सुरक्षित काम करने का माहौल मिला था। यह एक नई सोच है जो आपके लाइफस्टाइल में दिखती है।
क्या आप उन लोगों का प्रोडक्ट खरीदना चाहेंगे जो मजदूरों को बहुत कम पैसा देते हैं और उन्हें सुरक्षित माहौल भी नहीं देते? अगर आप अपनी लाइफस्टाइल को बदलना चाहते हैं तो इन बातों पर भी विचार करना जरूरी है।
आज दुनिया में लोग अपनी लाइफस्टाइल को पवित्र बनाना चाहते हैं। ऐसे में क्या आप उन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करेंगे जिनमें मेहनतकश मजदूरों और किसानों का शोषण हुआ हो? जब आप उन कंपनियों के प्रोडक्ट खरीदते हैं जहां मजदूरों को उचित मेहनताना और सम्मानजनक काम का माहौल मिलता है, तभी आप नैतिक रूप से सही कहलाते हैं।
स्टाइलिश नहीं, सुस्टाइलिश दिखना बहुत जरूरी है
जीरो वेस्ट और सर्कुलर फैशन
गांधी जी अक्सर कहा करते थे कि हमें उतना ही उपभोग करना चाहिए जितना जरूरी है। अनावश्यक रूप से ढेर सारे कपड़े या चीजें खरीद लेने से पर्यावरण को नुकसान ही होता है। कंपनियां संसाधनों का दोहन करके इन चीजों को बनाती हैं और फैशन के नाम पर बेचती हैं। लोग इन्हें खरीदते हैं और कुछ समय बाद फैशन बदलते ही ये चीजें बेकार हो जाती हैं।
इसलिए समझदारी यह है कि हम पुराने कपड़ों को नया रूप देकर या उन्हें री-यूज करके अपना फैशन और स्टाइल बेहतरीन बना सकते हैं। यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल भी है। बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज पहले ही इस दिशा में काम कर चुके हैं, अब आम व्यक्ति को भी समझना होगा कि फैशन की चकाचौंध के पीछे अंधाधुंध नहीं पड़ना चाहिए।
इस्तेमाल करें टाइमलेस डिजाइन
ऐसे डिजाइन वाले कपड़े, ज्वेलरी और फुटवियर खरीदने चाहिए जो हमेशा फैशन में रहें। इनमें आप यूनिक और सदाबहार लगेंगे। आपके व्यक्तित्व और विचार भी इनमें झलकेंगे। फैशन केवल कपड़े बदलने से नहीं, बल्कि पूरे व्यक्तित्व से समझ में आता है। टाइमलेस डिजाइन आपके पैसे की बचत भी करते हैं और आपको लंबे समय तक फैशन में बनाए रखते हैं।
क्यों जरूरी है सुस्टाइल?
पर्यावरण प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। खाने-पीने की चीजें भी प्रदूषण से मुक्त नहीं रह पाई हैं। लगातार कीटनाशकों के प्रयोग से पानी, मिट्टी और हवा प्रदूषित हो गई है। ऐसे में सुस्टाइल फैशन को अपनाना हमारी जिम्मेदारी बन जाती है।
भारत में इस फैशन स्टाइल को नया नाम अभिषेक कांत पांडे ने दिया है, जिसे सुस्टाइल कहा जाता है। हिंदी के उपसर्ग ‘सु’ का अर्थ अच्छा है और स्टाइल का अर्थ अंदाज। सुस्टाइल यानी एक अच्छा इंसान जो अपनी सोच और पहनावे के जरिए नैतिकता और पर्यावरण को बचाने की मुहिम में लगा हुआ है।
सुस्टाइल फैशन हमारे पर्यावरण का रक्षक है
आजकल की मानसिकता यह है कि जितना ज्यादा हम फैशन के अनुसार कपड़े बदलते हैं, उतने ही हम सभ्य और उन्नत कहलाते हैं। लेकिन अगर यह फैशन पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है और हमारे खाने की चीजों को हानिकारक बना रहा है तो हमें इसे नहीं अपनाना चाहिए।
हमें एक नई सोच के साथ पर्यावरण और नैतिकता के रक्षक के रूप में सामने आना चाहिए। अभिषेक कांत पांडे अपने लेखों और व्याख्यानों में लगातार यही बात लोगों को बताते रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई नई सोच नहीं है, बड़े-बड़े महापुरुष हमेशा से इन सिद्धांतों को अपनाते रहे हैं। हम इस दुनिया में रहते हुए भी पर्यावरण के अनुकूल और नैतिकता के दायरे में फैशन कर सकते हैं।
गांधी जी सादा जीवन और उच्च विचारों को महत्व देते थे। उनका कहना था कि हमें पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी खुद से शुरू करनी चाहिए।
लगातार फैशन का ट्रेंड पर्यावरण का दुश्मन है
फैशन इंडस्ट्री आज प्रदूषण फैलाने वाले सबसे बड़े उद्योगों में से एक है। लाखों टन कपड़े लैंडफिल में चले जाते हैं। सिंथेटिक कपड़ों से माइक्रो प्लास्टिक समुद्रों में पहुंच रहा है। एक जींस बनाने में करीब 7000 लीटर पानी लग जाता है। सुस्टाइल इन सभी समस्याओं का समाधान है। यह पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ हमारी सेहत भी बचाता है क्योंकि इसमें हानिकारक केमिकल और डाई का इस्तेमाल बहुत कम होता है।
सुस्टाइलिश कैसे बनें – आसान तरीके
क्वांटिटी कम, क्वालिटी ज्यादा
हमारे पास कितने कपड़े हैं, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि हमारे पास जो कपड़े हैं, वे कितने अच्छे और टिकाऊ हैं।
फैशन बाजार चाहता है कि आप बार-बार नई चीजें खरीदें। लेकिन सुस्टाइलिश व्यक्ति क्वालिटी वाली चीजें चुनता है जो लंबे समय तक चलें।
फैशन का पीछा छोड़ें, क्वालिटी अपनाएं। हर नए ट्रेंड के पीछे भागने की बजाय अच्छी चीजें चुनें।
खरीदते समय ब्रांड की कहानी जानें कि वे मजदूरों को उचित वेतन और सुरक्षित माहौल देते हैं या नहीं।
भारत में सुस्टाइल की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में सुस्टाइल तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। खादी आंदोलन महात्मा गांधी की देन है। खादी आज भी सबसे बड़ा ब्रांड है। हस्तशिल्प, पारंपरिक साड़ियां और कुर्ते पर्यावरण-अनुकूल हैं। मेक इन इंडिया प्रोडक्ट होने के कारण ये छोटे-छोटे लघु उद्योगों को बढ़ावा देते हैं।
रीसाइकल्ड मटेरियल, ऑर्गेनिक कॉटन और नेचुरल डाई से बने कपड़े आपको सुस्टाइलिश बनाते हैं।





