A1 And A2 Ghee : मार्केटिंग की भ्रामक दुनिया से सावधान रहें। लेकिन हमारे पास सही जानकारी नहीं होती है इसलिए खाद्य पदार्थ बेचने वाली कंपनियां हमें अपने विज्ञापनों के जरिए बेवकूफ बनाने की कोशिश करती है। अपने प्रॉडक्ट्स को बेहतर बताने के लिए उसमें न्यूट्रिएंट्स से और दूसरी प्रभावशाली बातों का जिक्र करती है।
दरअसल वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हमें पता चलता है कि केवल मार्केटिंग ही है। शुद्ध घी के प्रचार में कई तरह की भ्रामक मार्केटिंग इन दोनों कंपनियों द्वारा की जाती है। आपको बता दे की बाजार में A2 नाम से कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बेच रही है। दरअसल इन कंपनियों ने A1 नाम की देसी घी से बेहतर A2 को बताते हुए इसका भ्रामक प्रचार कर रही है।
हम बताने जा रहे हैं कि A1 और A2 देसी घी की जो मार्केटिंग बाजार में की जा रही है जिसमें एक को दोयम दर्जे का बताया जा रहा है आखिर पूरा माजरा क्या है।
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कंपनिया प्रचार कर रही है A2 घी है A1 घी से स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक, कितनी है सच्चाई जानिए!
दरअसल बाजार झूठ के व्यापार पर ही इस समय टिका हुआ जहां ब्रांडी के नाम पर आपके टूथपेस्ट में नमक है! जैसी बात कह कर मंजन भी बेच दिया जाता है। जबकि कहीं तो यह कह दिया जाता है कि समुद्री नमक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और रॉक नमक खाया कीजिए।
खैर इन बातों की अगर लिस्ट बनाना शुरू किया जाए तो तरह-तरह के ब्रांड तरह-तरह के दावे करते हुए नजर आते हैं जिसकी प्रयोगशाला में जांच करने के बाद जीरो ही नजर आता है। यह दावा फेक नजर आता है। इसी तरह का एक प्रीमियम प्रोडक्ट्स देसी घी कंपनियां लेकर इस समय बाजार में चिल्ला रही है। बल्कि इस देसी घी में पाए जाने वाले A2 के बारे में ऐसी बात बता रहे हैं ताकि आप अपने जेब ढीली करके इस प्रीमियम घी को लेकर अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं क्या ऐसा है?
दरअसल देसी घी बनाने वाली कंपनियां कहती हैं कि हमारी ब्रांच की A2 की प्रीमियम प्रोडक्ट है। प्रीमियम प्रोडक्ट बात कर यह साधारण देसी घी को भी मंहगेदम पर बेच रहे हैं। दरअसल कंपनियां तो यहां तक जावे कर देते हैं कि यह देसी गायों से बना हुए दूध का घी है जिसमें A2 पाया जाता है।
फिर उसके बाद दावा करते हैं कि A2 सूजन को काम करता है। बल्कि अपने विज्ञापन की ब्रांडिंग करते हुए अपने प्रोडक्ट को बेहतर बताते हुए यहां तक कहना नहीं चूकते की A1 भी क्रॉसब्रीड गायों के दूध से बना देसी घी स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता है। यह दावा वैज्ञानिक रूप से कितना सही है इसके बारे में जब हमने विषय विशेषज्ञ से बात की तो उन्होंने कहा कि यह दावा बिल्कुल झूठ है। उन्होंने बताया A2 कोई मायने नहीं रखता है।
A1 और A2 क्या है
देसी घी बेचने वाली कंपनियों A2 को बेहतर बताती हैं। इनके ब्रांडिंग के दावों की पोल खोल रहे हैं। आपको समझना होगा A1 व A2 नहीं बल्कि यह कंपनी के भ्रामक बात अधिक मुनाफे के लिए बेचने वाली फेक स्टैंडर्ड है, जिसके कोई मायने नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि दूध में मुख्य प्रोटीन में से एक बीटा-केसिन (beta-casein) है।
यह दो रूपों में होता है: A1 और A2। A1 बीटा-केसिन कुछ क्रॉसब्रीड गायों (होल्स्टीन, जर्सी आदि) के दूध में पाया जाता है, जबकि A2 केसिन प्रोटीन मुख्य रूप से देशी नस्लों में पाया जाता है। यह पचने में आसान होता है। अगर आप दूध दही छाछ लेते हैं तो A2 केसीन प्रोटीन यानी देसी गाय की प्रोडक्ट लेना आपके लिए फायदेमंद होता है। लेकिन घी के मामले में यह गलत है, दरअसल घी में प्रोटीन होता ही नहीं है दूध से घी बनने की प्रक्रिया में प्रोटीन खत्म हो जाता है इसलिए A1 A2 देखकर आप खरीदारी ना करें कंपनियां आपको बेवकूफ बना रही है A2 नाम की देशी घी देकर आपसे ज्यादा पैसे वसूल ले रही हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों में यह चर्चा है कि A1 दूध पचने पर BCM-7 नामक पेप्टाइड छोड़ सकता है, जो कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्या, सूजन या अन्य मुद्दे पैदा कर सकता है। A2 दूध को इससे मुक्त माना जाता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि यह केवल दूध, दही या छाछ तक सीमित है, क्योंकि जहां प्रोटीन बरकरार रहते हैं, जबकि घी में वसा की मात्रा अत्यधिक होती है।
13 साल यहां स्पष्ट कर दे की जी में प्रोटीन की मात्रा बहुत ही कम होती है इसलिए A1 और A2 यानी की विदेशी नस्ल की गायों से बना हुआ देसी घी और देसी गायों से बना हुआ देसी घी में कोई अंतर नहीं होता है। जैसा की कंपनियों के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है। यहां स्पष्ट है कि दूध, दही, छाछ और मट्ठा में प्रोटीन रहता है लेकिन घी बनाने की प्रक्रिया के बाद घी में प्रोटीन खत्म हो जाता है केवल 99.8% फैट होता है। अगर हम A1 और A2 दूध, दही, मट्ठा और छाछ में देख तो क्या फायदेमंद है
घी बनने की प्रक्रिया क्यों बदल देती है सबकुछ?
घी बनाने की पारंपरिक विधि सरल लेकिन प्रभावी है: दूध से मक्खन निकाला जाता है, फिर उसे गर्म करके पानी, लैक्टोज (चीनी) और केसिन प्रोटीन (जिसमें A1/A2 शामिल) को अलग कर दिया जाता है। अंत में बचा है शुद्ध वसा (fat)।
घी की संरचना: लगभग 99.5% से 99.8% शुद्ध वसा, बहुत कम नमी (0.2%)। प्रोटीन का मात्रा नगण्य (trace amounts) या शून्य के करीब।
जब दूध → दही → मक्खन → घी की पूरी प्रक्रिया होती है, तो A1 या A2 प्रोटीन या तो निकल जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। इसलिए घी में A1-A2 का अंतर समाप्त हो जाता है।
भारत की खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी स्पष्ट किया है कि A1-A2 का लेबलिंग घी के लिए भ्रामक है।
A1 And A2 Ghee मार्केटिंग की चाल
कई कंपनियां इस अंतर को बढ़ा-चढ़ाकर बेच रही हैं। “देशी गाय का A2 घी” कहकर दोगुना-तीगुना दाम। जबकि वास्तव में:
घी का स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता मुख्य रूप से गाय की नस्ल, चारा, पारंपरिक बिलोना विधि और शुद्धता पर निर्भर करते हैं।
अच्छा घी चुनने के लिए लेबल चेक करें: शुद्ध, बिना मिलावट, अच्छी पैकिंग और विश्वसनीय स्रोत। A1-A2 का दावा अनावश्यक है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अध्ययनों से साफ है कि A1/A2 विवाद दूध, दही, मट्ठा, छाछ के लिए लागू होता है लेकिन घी के लिए नहीं। Pure Indian Foods और अन्य स्रोतों के अनुसार, घी में प्रोटीन इतने कम होते हैं कि A1 या A2 का असर नहीं पड़ता। जो लोग दूध में A1 से समस्या महसूस करते हैं, वे घी का उपयोग बिना चिंता के कर सकते हैं।
क्या करें उपभोक्ता?
जागरुक रहें: महंगे A2 घी के नाम पर न फंसें। सामान्य शुद्ध घी भी उतना ही फायदेमंद है।
घर पर बनाएं: अगर संभव हो तो देशी गाय के दूध से खुद घी बनाएं—सबसे शुद्ध और सस्ता।
गुणवत्ता पर फोकस: घी का रंग सुनहरा, सुगंध अच्छी, और ठंडे में ठोस हो।
डॉक्टर/एक्सपर्ट सलाह: अगर कोई पाचन समस्या है तो डॉक्टर से परामर्श लें, न कि मार्केटिंग पर भरोसा करें। घी भारतीय रसोई का अमृत है। इसमें A1-A2 का झांसा मार्केटिंग की चाल है। शुद्ध, पारंपरिक तरीके से बना घी होना चाहिए। चाहे किसी भी गाय से के दूध से बना हो। स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। अपनी जेब और स्वास्थ्य दोनों बचाएं। इस जानकारी को शेयर करें ताकि अन्य भी भ्रामक प्रचार से बचे रहें।
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