14 जून को सोमवती अमावस्या: इसका महत्व, दान, पुण्य, अभिजीत मुहूर्त- सभी काम होंगे पूरे

By A.K. Pandey

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14 जून को सोमवती अमावस्या

14 जून को सोमवती अमावस्या : अधिक मास में सोमवती अमावस्या का महत्व बहुत बढ़ जाता है। 14 जून को सोमवती अमावस्या है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत बड़ा महत्व इसलिए हो जाता है कि इस दिन दान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पुरुषोत्तम मास का समय चल रहा है। सोमवार को सोमवती अमावस्या का पुराने और धार्मिक ग्रंथो में इसका वर्णन आता है। सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना के लिए इस दिन पत्नी अपने पतियों के लिए व्रत रखती है। सोमवती अमावस्या का आध्यात्मिक धार्मिक महत्व है। इस दिन पूजन पाठ स्नान दान करने से शुभ लाभ फल प्राप्त होता है।

सोमवती अमावस्या से जुड़ी मानता है कौन-कौन सी

सन 2026 को 14 तारीख को अमावस्या की तिथि पड़ रही है। सोमवती अमावस्या से जुड़ी कई मान्यताएं हैं, इसके बारे में हम यहां आपको विस्तार पूर्वक बताने जा रहे है।

इस दिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वैवाहिक जीवन उनका सुख पूर्वक बीते इसकी कामना करती हैं और ईश्वर से वरदान मांगती है।

माना जाता है कि इस पीपल के पेड़ की विशेष पूजा करने से त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश प्रसन्न होते हैं। पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है उन्हें प्रसन्न रखने के लिए इस दिन पूजा का बड़ा महत्व माना जाता है। इसके अलावा 108 बार पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है।

अमावस्या की तिथि पितरों के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन गंगा या नदियों में स्नान करने और तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन के व्रत को ‘अश्वत्थ (पीपल) प्रदक्षिणा व्रत’ भी कहा जाता है इस व्रत में मौन रहकर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा की जाती है। दरअसल परिक्रमा से हजारों गायों के दान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
सोमवार का दिन और अधिक मास से का समय चक्र युगल समय बनता है। शिव और विष्णु दोनों भगवान की कृपा मिलती है। दरअसल सोमवार का दिन भगवान शिव के लिए समर्पित माना जाता है जबकि अमावस्या तिथि विष्णु जी से जुड़ी हुई है इसलिए दोनों देवताओं की कृपा पाने का यह सर्वोत्तम समय माना जाता है।

सोमवती अमावस्या पर खास सहयोग

सोमवती अमावस्या यानी अमावस्या के समय खास धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बनता है जिससे के कारण यहां दिन बाद फलदाई साबित होता है। अधिक मास में सोमवती अमावस्या का फल बाद विशेष हो जाता है। दरअसल 3 साल बाद अधिक मास का योग बन रहा है जिस कारण से या सोमवती हमेशा अपने आप में खास हो जाता है।

दान, स्नान और पूजा का फल कई गुना अधिक बढ़ जाता है। दरअसल मिथुन संक्रांति का योग भी बन रहा है। इस दिन सूर्य राशि बदलते हैं और मिथुन राशि में आ जाते हैं।
15 जून सर्वार्थ सिद्धि योग है। इसके साथ ज्योतिष गणनाओं के अनुसार अमृत सिद्धि योग भी है इस दिन कोई भी कार्य बड़ा शुभ माना जाता है।

सोमवती रामेश्वर की तारीख और पूजा की शुभ मुहूर्त

सोमवती अमावस्या की तिथि का आरंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 पर होगी। इसका समापन 15 जून को सुबह 8:23 पर होगा। ऐसे में स्नान दान और पूजा के लिए मुहूर्त 15 जून को सुबह 3:33 से लेकर 4:55 तक होगा।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि विधान

इस दिन आप अगर व्रत करते हैं तो पूजा विधि विधान के बारे में यहां पर स्टेप बाय स्टेप आपको समझाया जा रहा है।

इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त पर उठ जाइए और पवित्र नदी में स्नान करके व्रत रखने और दान करने का मन से संकल्प लीजिए।
स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जल और गंगाजल, फूल चावल के दाने, रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दीजिए।
सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद काला तिल डालकर पितरों को तर्पण दीजिए। सोमवती अमावस्या के दिन अपने कुल देवी देवताओं की पूजा करें। साथ में भगवान विष्णु, भगवान शिव की पूजा करें। आप शिव और विष्णु मंत्रों का जाप भी करें।
भगवान शिव को दूध-गंगाजल और शहद से अभिषेक कारण भगवान विष्णु की पूजा करते हुए मित्रों का जाप करें इसे विशेष फल मिलता है।

अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा ऐसे करें

इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाकर दूध अर्पित करें। पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें।
इस दिन दान पुण्य करें। विशेष लाभ मिलता है।

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A.K. Pandey

A. K. Pandey एक प्रोफेशनल लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो शिक्षा, टेक्नोलॉजी और ट्रेंडिंग विषयों पर सरल, उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख लिखते हैं।लेखक इंटरनेशनल और नेशनल समाचार और संपादकीय लेखन से जुड़े रहे हैं। विभिन्न तरह के लेखन और संपादकीय का 10 साल से अधिक अनुभव है।

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