पीड़ा हरण हनुमान मंदिर मुंडेरा, प्रयागराज: बाएं हाथ से गदा उठाए हुए और दाहिने हाथ से आशीर्वाद देते हुए हनुमान जी वज्रासन में बैठी हुई प्रतिमा आने वाले भक्त की हर पीड़ा को दूर करती हैं। पूरी जानकारी, कैसे पहुंचें, इतिहास और अनुभव।
पीड़ा हरण हनुमान मंदिर मुंडेरा: प्रयागराज त्रिवेणी संगम के लिए प्रसिद्ध है। कुंभ मेले के लिए जाना जाता है। हर साल माघ मेले का आयोजन होता है, दूर-दूर से श्रद्धालु यहां संगम तट पर बंधवा के हनुमान जी की विशाल लेटी हुई प्रतिमा का दर्शन करते हैं। इसके साथ ही यहां पर छोटे बड़े और प्राचीन मंदिरों की बड़ी लिस्ट है, जिनके बारे में बहुत कम लोग भी जानते हैं।
प्रयागराज में हनुमान जी की दर्जनों से भी ज्यादा मंदिर हैं, जो इतिहास के झरोखे में दर्ज हैं। आज हम एक ऐसे भव्य हनुमान मंदिर का दर्शन कराने जा रहे हैं। यह मंदिर प्रयागराज जिले के मुंडेरा जीटी रोड पर स्थित है।
कलयुग में कष्ट से मुक्ति दिलाने वाले हनुमान जी हर जगह उपस्थित है। जब यहां मैं पहली बार आया तो हनुमान जी की प्रतिमा देखकर मंत्र मुग्ध हो गया। हनुमान जी की मूर्ति दिव्यता से ऐसा लग रहा था कि आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं। बाएं हाथ से गदा उठाए हुए और दाहिने हाथ से आशीर्वाद देते हुए हनुमान जी वज्रासन में अद्भुत अलौकिक लग रहे थे। हनुमान जी की प्रतिमा देखकर हृदय भक्ति में डूब गया।
पीड़ाहरण हनुमान जी की महिमा निराली, मंदिर और आसपास का इतिहास
इस पावन मंदिर के हनुमान जी की महिमा बड़ी निराली है। बाएं हाथ से गदा उठाए हुए और दाहिने हाथ से आशीर्वाद देते हुए हनुमान जी वज्रासन में बैठी हुई मूर्ति भक्तों पर कृपा और आशीर्वाद बरसाती है। हर मनोकामना पूर्ण करने वाले हनुमान जी यहां पर बरसों से विराजमान है।
दरअसल बताया जाता है कि यहां पर प्राचीन छोटा सा मंदिर था। हनुमान जी की मूर्ति लाल रंग की यहां पर थी। तब यह इलाका घना नहीं था।
बताया जाता है कि यहां पहले एक प्राचीन हनुमान जी की मूर्ति और मंदिर था। कुछ लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां पर एक प्राचीन मंदिर था जो बहुत जर्जर हो चुका था। यहां हनुमान जी की एक प्रतिमा थी। जिसकी खूब पूजा होती थी।
वर्तमान में पुराने मंदिर से कुछ दूरी पर एक विशाल और भव्य मंदिर बनाया गया। हनुमान जी की नई सगमरमर की मूर्ति स्थापित करायी गई। मंदिर में हनुमान जी की पुरानी मूर्ति की भी पूजा होती है। मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद यह मंदिर भक्तों के कष्ट दूर करने के चमत्कार के कारण स्थानीय नागरिकों में में चर्चित हो गई। हनुमान मंदिर की महिमा का गुणगान चारों तरफ फैल गया।
है। जैसा कि आपको बताया कि यहां पर प्राचीन समय से ही पूजा होती रही है क्योंकि मंदिर का प्रांगण पहले प्राचीन छोटी सी मंदिर हुआ करती थी अब या भव्य मंदिर का रूप धारण कर लिया है।
मुंडेरा हनुमान मंदिर पीड़ा हरण
दुख मुसीबत पीड़ा को हारने के लिए हिंदी में पीड़ा हरण शब्द का प्रयोग होता है। हनुमान जी सभी का कष्ट दूर करते हैं इसलिए उन्हें पीड़ाहरण भी कहा जाता है। इस मंदिर पर सच्चे मन से पूजा और प्रार्थना करता है हनुमान जी उनकी पीड़ा को कष्ट को दूर करते हैं।
पीड़ा हरण मंदिर के अंदर का दृश्य
पुराने जीटी रोड मुंडेरा के रास्ते पर स्थित मंदिर के अंदर का प्रांगण बहुत ही शांत और आध्यात्मिक है। जैसे ही मुख्य द्वार के अंदर आप प्रवेश करेंगे भगवान श्री हनुमान जी की भव्य मूर्ति सामने दिखाई देगी। जीटी रोड से भी भगवान हनुमान जी की प्रतिमा दिखाई देती है। वहां से गुजरने वाले लोग सर झुका कर प्रणाम करते हुए जाते हैं। दूर से मंदिर का शिखर बहुत ही अलौकिक सुंदर लगता है।
8-10 सीढ़ियां चढ़ने के बाद हनुमान जी का साक्षात दर्शन आपको प्राप्त होता है। मन में शांति और आध्यात्म की बारिश होने लगती है।
मंदिर के अंदर कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित है। यहाँ राधा-कृष्ण की भव्य मूर्ति पर स्थापित है। भगवान श्रीगणेश और भगवती मां दुर्गा जी की प्रतिमा के अलावा महादेव पार्वती की मूर्ति भी स्थापित है और प्रतिदिन पूजा-पाठ होता है।
अंदर प्रांगण में शिवलिंग स्थापित है, जहां पर भक्त सावन के महीने में जलाभिषेक करते हैं। प्रतिदिन इस मंदिर में सोमवार, मंगलवार, शनिवार बृहस्पतिवार को खास तौर पर भक्तों की भीड़ लगती है।
दूर-दूर से आते हैं भक्त
आसपास के स्थानीय लोग रोजाना यहां पर पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर की महिमा जानने वाले लोग प्रयागराज भ्रमण के लिए आते हैं तो यहां के दर्शन का लाभ भी जरूर उठाते हैं। भक्ता ईश्वर से अपने संकट दूर करने के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से भक्ति के संकट दूर होते हैं।
पता: पीड़ा हरण हनुमान मंदिर, मुंडेरा बाजार / मुंडेरा चुंगी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
नजदीकी लैंडमार्क: GT Road (ग्रैंड ट्रंक रोड) के पास, साईं कृष्णा प्लाजा के निकट।
कैसे पहुंचें पीड़ा हरण मंदिर
प्रयागराज जंक्शन से ऑटो/कैब द्वारा 20-30 मिनट।
प्रयागराज सिविल लाइंस या ट्रिवेणी संगम से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
बस या प्राइवेट वाहन से GT रोड होते हुए सीधा पहुंचना सुविधाजनक।
प्रयागराज के प्रमुख जगह से दूरी
प्रयागराज स्टेशन से के केवल 7 किलोमीटर दूरी पर और प्रयागराज बस स्टेशन से लगभग 8 किलोमीटर दूरी पर पीड़ा हरण मंदिर स्थित है। इस मंदिर से त्रिवेणी संगम मात्र 12 किलोमीटर दूरी पर है।
प्रयागराज आए तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें
पुराना जीटी रोड की तरफ कानपुर के रास्ते प्रयागराज आते हैं तो रास्ते में ही मुंडेरा चुंगी के थोड़ा आगे पीड़ाहरण प्रयागराज मंदिर पड़ता है। प्रयागराज से कानपुर सड़क रास्ते से जाने पर यह धूमनगनगंज थाने के थोड़ा आगे मुंडेरा सब्जी मंडी से थोड़ी दूरी पर दाहिने साइड में मंदिर आपको मिल जाएगा।
दर्शन का समय पीड़ा हरण मंदिर प्रयागराज
बेस्ट समय: सुबह 6 से 10 बजे या शाम 5 से 8 बजे। मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है।
इतिहास और किंवदंतियां
लोगों की जानकारी के अनुसार हम आपको बता दें कि प्राचीन हनुमान मंदिर पहले से था। बताया जाता है कि यह मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और प्रयागराज के मुंडेरा क्षेत्र के लोकल निवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। आज से 100 डेढ़ सौ साल पहले जीटी रोड पर उतना आवागमन नहीं था। मंदिर एकांत में और शांत वातावरण में स्थापित हुआ था। उसके पहले बताया जाता है कि यह बहुत प्राचीन मंदिर था। समय के साथ-साथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
भक्तों के कष्ट दूर करने वाले मुंडेरा के पीड़ा हरण मंदिर
कई भक्तों ने बताया की लगातार यहां पर दर्शन करने से उनकी पीड़ा और कष्ट दूर हुए हैं। प्राचीन महत्व वाले इस मंदिर में ऐसी चमत्कारिक शक्ति का एहसास भक्तों ने किया है।
मंदिर परिसर और अन्य विशेषताएं

मंदिर का आसपास का वातावरण शांत है। जीटी रोड के एकदम नजदीक स्थापित या मंदिर जीटी रोड के शोर होने के बावजूद भी इसके अंदर का वातावरण आध्यात्मिक और शांत भरा है।
यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा संगमरमर की है। इसके अलावा अनेक देवी देवताओं की भव्य मूर्तियां भी स्थापित है जो संगमरमर पत्थर की बनी हुई है। मंदिर के द्वारा के बाएं हाथ में शनिदेव मूर्ति स्थापित एक छोटा सा एक मंदिर है। यहां पीपल का वृक्ष है जिसके नीचे लोग दीप प्रज्ज्वलित करते हैं।
त्योहार- विशेष पूजन
हनुमान जयंती, मंगलवार, शनिवार — विशेष पूजा-अनुष्ठान। प्रतिदिन रोजाना सुबह शाम आरती भजन कीर्तन होता है। जेठ मास के मंगलवार, हनुमान जयंती विशेष पर्व पर यहां विशेष पूजन का आयोजन होता है।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव
मैंने पहली बार इस मंदिर के बारे में सुना तो मैं यहां पर दर्शन के लिए आया। पीड़ा और संकट हरने वाले हनुमान जी की प्रतिमा को देखा और श्रद्धा से सर झुकाया। ऐसे लगा जैसे हनुमान साक्षात सामने खड़े हैं। कुछ पल यहाँ पर बैठकर मैंने मन ही मन हनुमान चालीसा का वाचन किया। मन में ऐसी अध्यात्मिक और अद्भुत शांति मुझे प्राप्त हुई कि मन की उथल-पुथल पल भर में ही दूर हो गया। मैंने सोचा कि 5 मिनट ही व्यथित हुए होंगे लेकिन मैं आधे घंटे तक ईश्वर की आध्यात्मिक शक्ति में डूबा रहा।
मैंने आसपास देखा तो कई भक्त पूजा अर्चना कर रहे थे। मंदिर के अंदर राधे-कृष्णा, श्रीगणेश, भगवती माता दुर्गा, पार्वती-शिव की प्रतिमा के पास जाकर मैंने हाथ जोड़ा और आशीर्वाद प्राप्त किया।

तब तक आरती का समय हो गया था। चारों तरफ हनुमान जी की आरती के गुणगान से वातावरण गुंजित हो उठा। आरती और प्रसाद वितरण के बाद मैंने प्रस्थान किया। मन बहुत ही शांत और आध्यात्मिक हो गया था। अब जब भी अवसर मिलता है तो हनुमान जी के दर्शन करने मैं अवश्य यहां आता हूं।
मैंने देखा की मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त हनुमान जी को लड्डुओं का भोग और माला फूल अर्पित करते हैं।
पीड़ाहरण हनुमान मंदिर मुंडेरा प्रयागराज की धार्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर आप प्रयागराज आ रहे हैं तो बड़े मंदिरों के साथ-साथ इस शांत और शक्तिशाली मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
जय श्री राम! जय हनुमान!
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