संगम तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी : लेटे हुए हनुमान प्रयागराज, तीर्थराज प्रयागराज केवल गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन और चमत्कारिक धार्मिक स्थलों के लिए भी दुनिया में प्रसिद्ध है- प्रयागराज के बड़े हनुमान जी मंदिर। जहाँ भगवान हनुमान की विशाल लेटी हुई प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा 20 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी है। बलुआ पत्थर की बनी यह प्रतिमा की अद्भुत कथा है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ प्रयागराज की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। संगम तक की ओर जाने वाली दारागंज बांध के पुल के नीचे किले के पास से स्थित यह मंदिर धर्म और आस्था का और संस्कृति का अटूट संगम है।
हर साल माघ मेले, अर्धकुंभ और महाकुंभ के अवसर पर देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के साथ बड़े हनुमान जी के दर्शन कर अपनी धार्मिक यात्रा पूरा करते हैं। माना जाता है कि संगम स्नान के बाद बड़े हनुमान जी का दर्शन करने से ही पूरा पुण्य मिलता है । मान्यता है कि यहाँ दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा जीवन के संकट दूर होते हैं।
अगर आप भी यहां हनुमान जी के दर्शन करने और संगम स्नान के लिए आना चाहते हैं तो आप साल भर के किसी भी समय यहां आ सकते हैं लेकिन जनवरी-फरवरी के महीने में आप आते हैं तो यहां मार्च में लेकर भी आनंद आपको अवश्य उठाते हैं। अर्ध कुंभ हर 6 साल बाद मनाया जाने वाला भव्य मेला है। हर बार 12 साल में कुंभ मेले का आयोजन होता है। करोड़ों लोग यहां संगम तट और गंगा तट के किनारे स्नान करके पुण्य कमाते हैं।
लेटी हुई प्रतिमा की विशेषता
अकबर के ऐतिहासिक किले के समीप स्थित इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान हनुमान की विशाल लेटी हुई प्रतिमा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह विश्व का एकमात्र प्रमुख मंदिर है जहाँ हनुमान जी विश्राम मुद्रा में विराजमान हैं। मंदिर का गर्भगृह भूमि से नीचे स्थित है, जहाँ श्रद्धालु सीढ़ियों से उतरकर दर्शन करते हैं। हनुमान जी की प्रतिमा बलुआ पत्थर की बनी हुई है।
बाएं हाथ में गदा लिए हुए और दाहिने कंधे पर राम लक्ष्मण विराजमान है। लाल रंग का सिंदूर का चोला और फूलों का अद्भुत श्रंगार में हनुमान जी अद्भुत और अलौकिक लगते हैं। भक्तों के हर कष्ट को दूर करने के लिए उनके पीड़ा को हरने के लिए हनुमान जी साक्षात जैसे प्रकट हुए हैं।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान हनुमान ने माता सीता की आज्ञा से प्रयाग की रक्षा का दायित्व ग्रहण किया और इसी पवित्र भूमि पर विश्राम करने लगे। इसी कारण यह स्थान विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
प्रतिमा से जुड़ी लोककथाएँ
मंदिर से जुड़ी कई लोककथाएँ प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार गंगा का जलस्तर घटने पर यह प्रतिमा प्रकट हुई थी। जब इसे अन्यत्र ले जाने का प्रयास किया गया, तो प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। इसे दैवी संकेत मानकर वहीं मंदिर का निर्माण करा दिया गया।
एक अन्य कथा के अनुसार कन्नौज के एक व्यापारी ने पुत्र प्राप्ति की कामना से भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा बनवाई थी। यह प्रतिमा खास विंध्याचल के पहाड़ी से बलुआ पत्थर से बनाई गई। गंगा नदी से नाव पर प्रतिमा को लाया जा रहा था तभी संगम तट के पास अचानक नाव डगमगाने लगी और प्रतिमा गंगा जल में समा गयी। इसके बाद जब जल स्तर घटा तो प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया गया लेकिन काफी प्रयास के बाद हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। प्राप्त निर्देश के बाद उसने इस प्रतिमा को संगम तट पर स्थापित किया। समय के साथ प्रतिमा रेत में दब गई और बाद में दुबारा प्राप्त होने पर इसे वर्तमान स्वरूप में स्थापित किया गया। साधु संतों की आज्ञा से इस स्थान पर एक बहुत बड़ा मंदिर बनाया गया इस बड़े हनुमान जी का मंदिर कहा जाता है।
मुगल काल की भी एक घटना सामने आती है। बताया जाता है कि इसके पास किले का निर्माण हो चुका था और हनुमान जी की इस प्रतिमा को मुगल शासक बलपूर्वक हटाना चाहते थे। पर हनुमान जी की लीला अपरंपार है। मुगल शासक अकबर के सिपाही हनुमान जी के प्रतिमा को बलपूर्वक हटाने का भरपूर प्रयास किया लेकिन प्रतिभा 1 इंच भी अपनी जगह से हिली नहीं।
हनुमान जी की यह प्राचीन प्रतिमा में इतनी शक्ति समय हुई है कि मुगल शासक अकबर की सिपाही भय खाकर वहां से भाग गए। तब से निरंतर हनुमान जी की पूजा अर्चना होती रही और आज जा आस्था का केंद्र बना हुआ है। हनुमान जी के भक्त यहां पर हर मंगलवार और शनिवार को आते हैं। इन दिनों का बड़ा ही महत्व होता है। संगम स्नान का पूर्ण तब तक सफल नहीं होता है जब तक बड़े हनुमान जी का दर्शन श्रद्धालु करके नहीं जाते हैं। कुंभ और अर्द्ध कुम्भ मैं इतनी भीड़ होती है कि बड़े हनुमान जी के मंदिर का द्वारा सुरक्षा दृष्टि के कारण बंद करना पड़ता है तब श्रद्धालु जन हनुमान मंदिर के परिसर से शिखर दर्शन करके संगम स्नान करने के लिए बढ़ते हैं।
मानसून में गंगाजल करता है अभिषेक
मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि वर्षा ऋतु में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर गंगाजल मंदिर तक पहुँच जाता है और भगवान हनुमान का प्राकृतिक अभिषेक होता है। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। स्थानीय लोग हनुमान जी को बड़े हनुमान जी, किले वाले हनुमान जी, लेटे हनुमान जी तथा बाँध वाले हनुमान जी के नाम से भी जानते हैं।
भक्ति और आध्यात्मिकता का केंद्र
प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल होने वाली आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के पाठ से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से भर उठता है। श्रद्धालु विशेष रूप से मोतीचूर के लड्डुओं का भोग अर्पित करते हैं और संकटमोचन से सुख, समृद्धि तथा रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रयागराज के अन्य प्रमुख हनुमान मंदिर
बड़े हनुमान जी मंदिर के अतिरिक्त प्रयागराज में कई अन्य प्रसिद्ध हनुमान मंदिर भी स्थित हैं।
दारागंज का संकटमोचन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ हनुमान जी के साथ शिव, पार्वती, गणेश, भैरव, दुर्गा, काली तथा नवग्रहों की प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं।
हनुमत निकेतन मंदिर में भगवान हनुमान दक्षिणमुखी स्वरूप में विराजमान हैं। यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।
इसके अलावा झूसी क्षेत्र का 108 शिवलिंग हनुमान मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, जहाँ विशाल हनुमान प्रतिमा के साथ शिवभक्ति और रामभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
आस्था का जीवंत प्रतीक
सदियों से प्रयागराज के ये हनुमान मंदिर श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा के जीवंत प्रतीक बने हुए हैं। संगम स्नान के साथ बड़े हनुमान जी के दर्शन को आज भी तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर भगवान हनुमान जी की कृपा पाते हैं। अपने जीवन में सुख, शांति तथा मंगल की कामना करते हैं।






