स्कूल के सरकारी और प्राइवेट टीचर नहीं पढ़ा सकते हैं कोचिंग-ट्यूशन: RTE एक्ट और CBSE नियम होने के बावजूद हो रहा उलंघन

By A.K. Pandey

Updated on:

RTE एक्ट और CBSE नियम


RTE एक्ट और CBSE नियम :
स्कूल के शिक्षक (सरकारी या प्राइवेट) किसी भी बच्चे को कोचिंग या प्राइवेट ट्यूशन नहीं पढ़ा सकते हैं। दरअसल अच्छी शिक्षा देने के लिए और शिक्षा के बाजारीकरण को रोकने के लिए स्कूल-कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षकों को ट्यूशन और कोचिंग की गतिविधियों से रोकने के लिए आरटीई एक्ट और सीबीएसई बोर्ड की गाइडलाइन है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले टीचर किसी भी बच्चे को प्राइवेट ट्यूशन-कोचिंग नहीं पढ़ा सकते हैं लेकिन लगातार इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। आज की खबर में किसी का करने जा रहे हैं विश्लेषण। हर सवाल का जवाब आपको मिलने वाला है। वही हम आपको बता दे कि जो शिक्षक किसी भी शिक्षण संस्थान या स्कूल में पढ़ाते नहीं है, उनके लिए ट्यूशन-कोचिंग पर रोक का कोई भी नियम लागू नहीं होता है।

क्या है सीबीएसई और आरटीई एक्ट के नियम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गाइडलाइंस और आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 28 के अनुसार, शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन देना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
यह नियम छात्रों के शोषण को रोकने और शिक्षकों को स्कूल में पूर्ण रूप से समर्पित रखने के लिए बनाया गया है। उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई की भी बात कही गई है। आगे हम बताएंगे किस नियम के तहत रोक लगाई गई है। दरअसल आरटीई एक्ट 2009 के अंतर्गत यह साफ लिखा है कि किसी स्कूल या कॉलेज में पढ़ाने वाले टीचर किसी भी स्टूडेंट को ट्यूशन या कोचिंग नहीं पढ़ा सकते हैं। सीबीएसई की गाइडलाइन में भी इस बात का जिक्र है। दरअसल शिक्षा के व्यवसायीकरण रोकने के लिए यह नियम बनाए गए हैं। लेकिन इन नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही है। भारत के अलग-अलग शहरों में ऐसे कई स्कूल टीचर है जो कोचिंग और ट्यूशन पढ़ाते हैं।

इन शिक्षकों पर नहीं लागू होता है नियम

जानकारी के मुताबिक जो शिक्षक किसी स्कूल या शिक्षण संस्थान मैं बच्चों को पढ़ते नहीं है ऐसे शिक्षकों के लिए कोचिंग और ट्यूशन के लिए कोई पाबंदी नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षक किसी स्कूल या कॉलेज में टीचर नहीं है। उन पर यह नियम लागू नहीं होता है। ऐसे टीचर ऑनलाइन ऑफलाइन कोचिंग पढ़ सकते हैं।

आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 28 क्या कहता है जानिए

यहां पर हम आरटीई एक्ट 2009 के धारा 28 के बारे में पूरा समझने जा रहे हैं। सबसे पहले आपको बता दे की क्या लिखा है धारा 28 के अंग्रेजी मूल पाठ में‌।

धारा 28 का पूर्ण पाठ (अंग्रेजी में मूल)
Section 28: Prohibition of private tuition by teacher
“No teacher shall engage himself or herself in private tuition or private teaching activity.”
हिंदी भाषा में सरल अर्थ
कोई भी शिक्षक निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण गतिविधि में खुद को शामिल नहीं करेगा।

हम यहां पर इसकी विस्तार से व्याख्या कर रहे हैं

धारा 28 आरटीई अधिनियम 2009 का एक बहुत महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
शिक्षकों का पूर्ण समर्पण स्कूल के प्रति सुनिश्चित करना
शिक्षक का मुख्य काम स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है। अगर वे स्कूल के बाद ट्यूशन पढ़ाएंगे तो उनकी ऊर्जा, समय और ध्यान स्कूल के बच्चों से हट जाएगा।

छात्रों के शोषण को रोकना

अक्सर देखा जाता है कि स्कूल के शिक्षक अपनी कक्षा के कमजोर बच्चों को ट्यूशन के लिए प्रेरित करते हैं या दबाव डालते हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। इससे शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है।

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना

जब शिक्षक स्कूल में ही पूरे मन से पढ़ाएंगे, तो कक्षा में ही सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। ट्यूशन की संस्कृति कम होगी। लेकिन एक प्रश्न उठता है की प्राइवेट शिक्षक की सैलरी इतनी कम होती है कि उसे दूसरे काम करके अपने आय को बढ़ाना होता है। उसके लिए सबसे सुलभ तरीका ट्यूशन और कोचिंग होता है। अगर इस पर भी शक्ति से रोक लगाया गया तो क्या होगा? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

यह धारा किन पर लागू होती है?

  • सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षक
  • प्राइवेट स्कूलों (अनुदानित या गैर-अनुदानित) के सभी शिक्षक
  • यानी सभी प्रकार के मान्यता प्राप्त स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक

नोट: यह प्रतिबंध केवल स्कूल में कार्यरत शिक्षकों पर है। जो व्यक्ति स्कूल में नहीं पढ़ाते, केवल कोचिंग सेंटर चलाते हैं, उन पर यह धारा लागू नहीं होती।

आखिर नियमों का उद्देश्य क्या है

  • शिक्षकों को non-educational activities से दूर रखना
  • स्कूल में पूरा समय (full time) और पूरी समर्प समर्पण (full commitment) सुनिश्चित करना
  • शिक्षा को व्यावसायिक शोषण से बचाना

उल्लंघन की स्थिति में क्या हो सकता है?

  • स्कूल प्रबंधन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई
  • वेतन रोकना, पदोन्नति रोकना या यहां तक कि नौकरी से बर्खास्तगी
  • आरटीई अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई

CBSE ने ट्यूशन और कोचिंग पर लगाई है रोक

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह नियम आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 28 की बात को लागू कराता है। सीबीएसई की Affiliation Bye-Laws में Rule 39 (Private and Other Tuitions) साफ बताता है।
“No staff member shall undertake private or any other tuition.”

इसका मतलब है कि सीबीएसई से संबद्ध किसी भी स्कूल (सरकारी या प्राइवेट) का कोई भी स्टाफ सदस्य, शिक्षक या कर्मचारी निजी ट्यूशन, कोचिंग या कोई अन्य प्रकार की प्राइवेट टीचिंग गतिविधि नहीं कर सकता। यह प्रतिबंध स्कूल के अंदर या बाहर, स्कूल समय के बाद घर पर या कोचिंग सेंटर पर भी लागू होता है।

सीबीएसई द्वारा मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों के लिए जारी किया था सर्कुलर


2017 के CBSE सर्कुलर
में भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई शिक्षक RTE Act की Section 28 और Affiliation Bye-Laws के Rule 39 के अनुसार प्राइवेट ट्यूशन नहीं ले सकता।

इस नियम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को स्कूल के प्रति पूर्ण समर्पण सुनिश्चित करना है। जब शिक्षक स्कूल में ही पूरे मन से पढ़ाएंगे, तो कक्षा में सभी बच्चों को समान रूप से अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। इससे ट्यूशन की संस्कृति कम होगी और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
सीबीएसई का मानना है कि कई शिक्षक अपनी क्लास के कमजोर छात्रों को ट्यूशन के लिए प्रोत्साहित करते हैं या दबाव डालते हैं, जो छात्रों के शोषण के समान है। इसलिए यह सख्त नियम बनाया गया है। Rule 39 में ग्रुप ट्यूशन को स्कूल परिसर में भी प्रतिबंधित किया गया है।

आरटीई एक्ट और सीबीएसई के नियम शिक्षकों को प्राइवेट टीचर और कोचिंग रोकती है

धारा 28 यह सुनिश्चित करती है कि स्कूल का शिक्षक केवल स्कूल के लिए हो, न कि ट्यूशन का व्यवसाय करने वाला। यह बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को व्यावहारिक रूप देने का एक मजबूत कदम है।

सीबीएसई का मानना है कि कई शिक्षक अपनी क्लास के कमजोर छात्रों को ट्यूशन के लिए प्रोत्साहित करते हैं या दबाव डालते हैं, जो छात्रों के शोषण के समान है। इसलिए यह सख्त नियम बनाया गया है। Rule 39 में ग्रुप ट्यूशन को स्कूल परिसर में भी प्रतिबंधित किया गया है।
उल्लंघन की स्थिति में क्या होता है?

  • स्कूल प्रबंधन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई
  • वेतन रोकना, इंक्रीमेंट रोकना या नौकरी से बर्खास्तगी
  • स्कूल की Affiliation पर भी असर पड़ सकता है

यह नियम शिक्षकों की सेवा शर्तों का हिस्सा है। नियुक्ति के समय ही शिक्षकों को इस बारे में लिखित रूप से सूचित किया जाता है। सीबीएसई समय-समय पर स्कूलों को याद दिलाता है कि वे इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
संक्षेप में, सीबीएसई की गाइडलाइंस आरटीई एक्ट जितनी ही सख्त है। दोनों नियम मिलकर शिक्षा को व्यावसायिक शोषण से मुक्त रखने और स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास करते हैं।

भारत में शिक्षा के व्यवसायिक होने को रोकने के लिए सारे नियम बनाए गए हैं लेकिन क्या प्राइवेट शिक्षकों को बेहतरीन सैलरी मिलती है? यह एक बड़ा प्रश्न है। आप भी कमेंट करके हमें जरूर बताएं। प्राइवेट शिक्षकों को कितनी सैलरी मिलती है? क्या उन्हें RTE एक्ट के अनुसार सैलरी मिलती है? भारत में अधिकांश से स्कूलों में सैलरी इतनी कम है कि शिक्षक मजबूरी में कोचिंग-ट्यूशन पढ़ाते हैं ताकि उनका घर का खर्चा चल पाए। बढ़ती महंगाई के कारण प्राइवेट के शिक्षकों की स्थिति बद से बेहतर हो रही है लेकिन प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

यह एक बहुत बड़ा प्रश्न शिक्षकों की ओर से आ रहा है। आप भी अपनी कमेंट जरूर लिखें।

A.K. Pandey

A. K. Pandey एक प्रोफेशनल लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो शिक्षा, टेक्नोलॉजी और ट्रेंडिंग विषयों पर सरल, उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख लिखते हैं।लेखक इंटरनेशनल और नेशनल समाचार और संपादकीय लेखन से जुड़े रहे हैं। विभिन्न तरह के लेखन और संपादकीय का 10 साल से अधिक अनुभव है।

Related Post

Leave a Comment