Class 6th To 10th Sanskrit Study Plan: संस्कृत विषय को छठवीं से शुरू करके 10वीं तक मजबूत बनाने के लिए पढ़ाई का प्लान

By A.K. Pandey

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Class 6th To 10th Sanskrit Study Plan

Class 6th To 10th Sanskrit Study Plan : CBSE/NEP नई शिक्षा नीति के अंतर्गत आप तीन भाषण विद्यार्थियों को पढ़ना पड़ेगा। सन 2026-27 के छठवीं क्लास के विद्यार्थियों के लिए आने वाले 10वीं की बोर्ड की परीक्षा में तीसरे भाषा के रूप में आपको कोई भारतीय भाषा पढ़नी होगी। मान लीजिए कि आपकी हिंदी और अंग्रेजी भाषा है तो तीसरी भाषा आपके लिए कोई भी इंडियन लैंग्वेज हो सकती है लेकिन बहुत से लोग संस्कृत ले रहे हैं अगर आपका अच्छा छठवीं में संस्कृत विषय पढ़ रहे हैं इस समय तो आने वाले बोर्ड एग्जाम में यानी 3 साल बाद आपको हिंदी अंग्रेजी और संस्कृत में बोर्ड परीक्षा देनी होगी।

Class 6th To 10th Sanskrit Study Plan वर्तमान नियम r1 r2 r3 भाषा

कोठारी आयोग ने तीन भाषा का नियम सुझया था। अब नहीं शिक्षा नीति 2020 से में तीन भाषा पढ़ने का नियम लागू किया जा रहा है। कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों के लिए यह तीन भाषा के नियम लागू किया गया है जोकि आने वाले बोर्ड परीक्षा में उन्हें तीसरी भाषा के रूप में जिस भाषा का अध्ययन उन्होंने कक्षा छठवीं में किया है उसे चुनना होगा।

छठवीं क्लास के विद्यार्थी सत्र 2030- 31 में दसवीं की परीक्षा में बैठेंगे और इस समय हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा में तीन भाषाओं की परीक्षा देनी है। तब सवाल उठता है कि संस्कृत भाषा की तैयारी कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों को कैसे करनी चाहिए? हम यह मन कर चलते हैं कि अधिकांश ऐसे विद्यार्थी जो हिंदी अंग्रेजी के साथ तीसरी भाषा संस्कृत चुनते हैं उनके लिए सांस्कृतिक कठिन हो सकता है और सरल भी हो सकता है।
लेकिन कक्षा छठवीं के विद्यार्थी नया-नया संस्कृत विषय छठवीं क्लास में पढ़ते हैं। इस विषय में कैसे तैयारी करें कि अपनी बोर्ड की 10वीं की संस्कृत परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सके। तो उनके पास केवल 3 साल का समय है और इसमें संस्कृत विषय का अध्ययन करना है। हमारा आर्टिकल इसी पर केंद्रित है यानी कि हम अपने आर्टिकल में इन्हीं बातों को विस्तार पूर्वक पूरे गाइडलाइन के साथ प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

छठवीं के विद्यार्थी कक्षा दसवीं के बोर्ड की तैयारी कैसे करें

सत्र 2026 – 27 में छठवीं के विद्यार्थी संस्कृत भाषा लिए हुए हैं और इन्हें दसवीं के बोर्ड की तैयारी के लिए अभी से तैयार होना होगा। दरअसल इन पर पूरा नियम सन 2029-30 के बोर्ड परीक्षा पर लागू होगा यानी की तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी होगी।

बोर्ड परीक्षा में स्कोरिंग सब्जेक्ट के रूप में संस्कृत बहुत कम आने वाला है। देखिए तीसरी भाषा के रूप में अधिकांश लोग संस्कृत ही लेंगे क्योंकि हिंदी पढ़ने वाले के लिए संस्कृत बहुत आसान हो जाती है।

अधिकांश स्कूलों में तीन भाषा के नियम में कांबिनेशन क्या है

अब यहां हम बात कर रहे हैं कि तीन भाषा के नियम के अंतर्गत अधिकतर स्कूलों में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत का फार्मूला अपनाया जा रहा है। संस्कृत की जगह पंजाबी, हरियाणवी, गुजराती, मराठी जैसी रीजनल भाषाएँ भी ली जा सकती है। चलिए आगे हम आपको बता रहे हैं की बेसिक कैसे मजबूत करना है छठवीं क्लास में आपको क्या पढ़ना है ताकि आपकी छठवीं क्लास से का सिलेबस व्याकरण सहित तैयार हो जाए।

वर्ण माला और बेसिक पर ध्यान दीजिए

कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों के लिए सबसे पहले काम होना चाहिए कि वह संस्कृत के वर्णमाला को ध्यानपूर्वक पड़े जो की हिंदी की वर्णमाला से मिलती-जुलती है।
व्यंजन और स्वर की उत्पत्ति और उनके उच्चारण कैसे होता है यह अपने शिक्षक से जरूर समझे। धैर्य पूर्वक इनको प्रैक्टिकल से समझने की कोशिश करें। वर्णमाला में शामिल होता है स्वर और व्यंजन संस्कृत में स्वर बिना किसी सहायता से बोले जाते हैं। जबकि व्यंजन को बोलने के लिए स्वर की सहायता का प्रयोग होता है।
हिंदी के स्वर अपने 11 पढ़े होंगे लेकिन संस्कृत में दो स्वर और जुड़ जाते हैं। इस तरह से देखा जाए तो संस्कृत में तेरह स्वर होते हैं। पाणिनी व्याकरण में इसे महेश्वर सूत्र भी कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन्हीं सूत्रों से संस्कृत के वर्णमाला और पूरी संस्कृत के शब्दों की उत्पत्ति हुई है।

आइए इन स्वरों के बारे में आपको बताते हैं इसके उच्चारण स्थान भी अलग-अलग होते हैं इसे भी आपको समझना चाहिए।

मूल स्वर या जिसे ह्रस्व स्वर

संस्कृत में मूल स्वरों की संख्या पांच प्रकार की होती है। अभी मूल सवारों को बोलने में बहुत कम समय लगता है इसीलिए इसे ह्रस्व मतलब छोटा स्वर भी कहा जाता है। उनकी सूची नीचे दी गई है आप इन्हें बोलकर समझ सकते हैं कि इनका उच्चारण स्थान क्या है और कितना कम समय लग रहा है।

अ (a)
इ (i)
उ (u)
ऋ (ṛ)
ऌ (Lro)

दीर्घ और संयुक्त स्वर

संस्कृत में दूसरे स्वर दीर्घ और संयुक्त स्वर है
संस्कृत में दूसरे स्वरों की category जो है वह दीर्घ और संयुक्त स्वर है। अब आप सोचिए कि इन्हें इन नाम से क्यों पुकारा जाता है। दरअसल बता दे कि संस्कृत भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके हर अक्षर में विज्ञान छिपा हुआ है। इसे आगे बताया जा रहा है समझिए।
दीर्घ और संयुक्त स्वरों कुल संख्या 8 है। दरअसल मूल स्वरों को दुगना समय में इसे बोला जाता है। इसके अलावा एक बात आपको समझनी होगी कि संयुक्त स्वर दो ह्रस्व स्वर को मिलाकर बनाया जाता है। अब आपको इसे समझना आसान हो जाता है। इसलिए संस्कृत को उन्नत वैज्ञानिक भाषा कहा जाता है।

नीचे उदाहरण दिया गया है।
अ+अ=आ
इ+इ=ई
उ+उ=ऊ
अब हम बात करते हैं संयुक्त स्वर की संयुक्त स्वर को हम संधि स्वर भी कहते हैं क्योंकि यह संधि के नियमों का पालन करता है। ए, ऐ, ओ, औ यह चार स्वर संधि स्वर कहलाते हैं। इन्हें ध्यान से देखिए तो एक ही उत्पत्ति कैसे हुई है उसके बारे में निम्नलिखित चार्ट से समझा जा सकता है।
अ + इ / ई = ए
अ + उ / ऊ = ओ
अ / आ + ए / ऐ = ऐ
अ / आ + ओ / औ = औ

आ (ā)
ई (ī)
ऊ (ū)
ॠ (ṝ)
ए (e)
ऐ (ai)
ओ (o)
औ (au)

  • संस्कृत में अयोगवाह भी होते हैं, जो स्वर के साथ प्रयोग होते हैं। अनुस्वार ( ं ) और विसर्ग ( ः )
  • कक्षा छठवीं में संस्कृत सीखने का तरीका ताकि दसवीं क्लास तक पहुंचते पहुंचते आप हो जाए बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार
  • कक्षा छठवीं में संस्कृत सीखने के लिए आपको क्या-क्या प्रयास करना चाहिए इसके लिए पूरी जानकारी हम यहां पर नीचे दे रहे हैं।

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत संस्कृत भाषा सीखने के लिए सबसे पहले आपको वर्णमाला पर ध्यान देना होगा क्योंकि हिंदी और संस्कृत की वर्णमाला एक ही है लेकिन अक्षरों के उच्चारण संबंधी ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

संस्कृत सीखने के लिए पहले बेसिक मजबूत करें कक्षा छठवीं और सातवीं में आते ही आपको वर्णमाला के उच्चारण संबंधित नॉलेज होना चाहिए। संस्कृत वर्णमाला यानी देवनागरी वर्णमाला को सीखने के लिए पाणिनि के सूत्र का उपयोग करना जरूरी हो जाता है। सबसे पहले आपको वर्णमाला के उच्चारण में सवार पर फोकस करना होता है। हिंदी में सवार 11 होते हैं जबकि संस्कृत में 13 स्वर होते हैं। संस्कृत में 11 स्वरों के अलावा ये दो स्वरों का भी प्रयोग होता है जो है- लृ और ॠ इन्हें दीर्घ स्वर कहा जाता है। दीर्घ स्वर इसकी कहा जाता है क्योंकि इनके उच्चारण में दुगना समय लगता है।

एनसीईआरटी की किताबें पढ़िए

एनसीईआरटी की कक्षा छठवीं सातवीं आठवीं और नौवीं दसवीं की किताबें पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें बेसिक संस्कृत से लेकर हाई लेवल की संस्कृत भी होती है।
दीपकम् एनसीईआरटी की किताब कक्षा छठवीं और आठवीं में पढ़ाई जाती है इसके साथ एक कक्षा नौवीं में शारदा पुस्तक पढ़ाई जा रही है।
गद्य और पद्य शोक की तैयारी इसमें दिया हुआ है इसके साथ ही प्रश्न उत्तर और शब्द रूप दिया गया है।

लकार का ज्ञान

किसी भी भाषा में क्रिया है उसका समय होता है और क्रिया के विभिन्न रूप को संस्कृत में लाकर कहा जाता है। सबसे पहले और बड़ी बात यह है की क्रिया का मूल रूप को धातु कहलाता है जैसे गम धातु से जाने की क्रिया संस्कृत में गच्छति लट् लकार का प्रथम पुरुष एक वचन होता है।
संस्कृत में मुख्य रूप से पांच लकार होते हैं इन्हें समझ लीजिए ताकि संस्कृत से लिखना पढ़ना आसान हो सके।

लट् लकार (Present Tense / वर्तमान काल): वर्तमान काल में जो घटना घट रही है उसे लत लाकर यानी प्रेजेंट टेंस कहते हैं। उदाहरण के लिए बालिका पठति। (बालिका पढ़ती है।)

लङ् लकार (Past Tense / भूतकाल): बीते हुए समय को इस लाकर से प्रस्तुत किया जाता है जैसे- स: अपठत्। (उसने पढ़ा। )

लृट् लकार (Future Tense / भविष्यत् काल): जो कार्य भविष्य में होने वाला है उसके लिए लृट् लकार का प्रयोग होता है। – वह पढे़गा। इसकी संस्कृत- स: पठिष्यति।

लोट् लकार (Imperative Mood / आज्ञा या प्रार्थना): किसी को आज्ञा देना या प्रार्थना करने वाले वाक्य होते हैं।
जैसे: त्वम् पठतु (तुम पढ़ो)।

विधिलिङ् लकार (Potential Mood / चाहिए): किसी कार्य को करने की इच्छा या उपदेश देने वाले वाक्य। उदाहरण: स: पठेत (उसे पढ़ना चाहिए)।

छोटे-छोटे अनुच्छेद लिखो

संस्कृत भाषा में छोटे-छोटे अनुच्छेद लिखने की प्रैक्टिस से करनी चाहिए जैसे-

  1. मम् सदनम् (मेरा घर)
  2. मम विद्यालय (मेरा स्कूल)

1. मम सदनम्: (मेरा घर)

मम सदनम् अतीव सुन्दरम् अस्ति। अस्माकं गृहं नगरे अस्ति। गृहस्य समीपे एकः वृहद् उद्यानः अस्ति। गृहे त्रय: कक्षाः, एक: शयनकक्ष:, एकः पाकशाला, एकः स्नानकक्षःच सन्ति। मम पिता गृहस्य सम्मुखे पुष्पाणि रोपयति। सायंकाले वयं सर्वे परिवारसहिता गृहस्य प्राङ्गणे क्रीडामः। अहं मम सदने अतीव सुखम् अस्मि।

2. मम विद्यालयः (मेरा स्कूल)

मम विद्यालयः नगरस्य मध्ये अस्ति। अस्य नाम क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट स्कूल अस्ति। अत्र पञ्चशताधिकाः विद्यार्थी पठन्ति। विद्यालये सुन्दरः उद्यानः, विशालः क्रीडाङ्गणः च अस्ति। अस्माकं शिक्षकाः अतीव दयालवः सन्ति। अहं प्रातःकाले विद्यालयं गच्छामि। अत्र अहं संस्कृतं, गणितं, विज्ञानं च पठामि। मम विद्यालयः मम द्वितीयः गृहम् इव अस्ति।

अन्य सरल विषय (अनुच्छेद लिखने के लिए)

मम माता (My Mother)
मम पिता (My Father)
मम मित्रम् (My Friend)
मम प्रिय पुस्तकम् (My Favourite Book)
मम प्रिय फलम् (My Favourite Fruit)
मम प्रिय पशुः (My Favourite Animal)
दीपावलिः (Diwali)
मम दिनचर्या (My Daily Routine)

लिखने के सरल नियम (प्रैक्टिस के लिए):

संस्कृत के हर अनुच्छेद को 5 से 8 वाक्य में जरूर लिखें।
अनुच्छेद शुरू करने के लिए विषय का परिचय देना चाहिए जो दो-तीन लाइन में होना चाहिए।
सरल धातुओं का प्रयोग करें: अस्ति, सन्ति, गच्छामि, पठामि, खादामि, पश्यामि आदि। व्याकरण के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए।

संस्कृत की पढ़ाई करने के लिए कक्षा 6 से इन नियमों का पालन जरूर कर लेना चाहिए आपको बता दें कि संस्कृत में बालक बालिका नदी गुरु इत्यादि का रूप अच्छे से याद कर लेना चाहिए और पठ धातु के सभी लकार याद करना चाहिए।

संस्कृत पढ़ने का बेसिक तरीका – Download complete Pdf

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A.K. Pandey

A. K. Pandey एक प्रोफेशनल लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो शिक्षा, टेक्नोलॉजी और ट्रेंडिंग विषयों पर सरल, उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख लिखते हैं।लेखक इंटरनेशनल और नेशनल समाचार और संपादकीय लेखन से जुड़े रहे हैं। विभिन्न तरह के लेखन और संपादकीय का 10 साल से अधिक अनुभव है।

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