भारत में AI पिछड़े होने के कारण: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अपना लोहा मनवा दिया है। आज बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए कोई कार्य नहीं किया जा सकता हो। विषय विशेषज्ञ कहते हैं कि शिक्षा-स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी निर्माण-प्रोडक्शन कार्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से की सेवा वर्तमान में जरूरी हो गई है।
भारत की आईटी सेक्टर का दबदबा पूरी दुनिया में बना था लेकिन जैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आविष्कार हुआ आखिरकार भारत पिछड़ कैसे गया यह एक बड़ा प्रश्न है?
भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था AI में पिछड़ा क्यों?
भारत विश्व की सबसे ग्रोइंग इकोनॉमिकल कंट्री है लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वह अमेरिका और चीन से काफी पीछे है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत तीसरे स्थान पर है। यह बात हम स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के AI इंडेक्स और दूसरी रिपोर्ट्स के जरिए बता रहे हैं।
लेकिन वही फाउंडेशन मॉडल कंप्यूटर पावर और रिसर्च आउटपुट से यह पता चलता है कि हमारे पिछड़े पान का प्रमुख कारण इसका ऐतिहासिक आईटी मॉडल जिसमें सुधार नहीं हुआ इसके अलावा ब्रेन ड्रेन और इसके लेवल इनोवेशन की कमी शामिल है।
दरअसल भारत का आईटी सेक्टर 10 को से केवल आउटसोर्सिंग और बॉडी सेटिंग और को एंड प्रोग्रामिंग सेवा पर ही निर्भर रहा है। इस सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अमेरिका और चीन की तरह काम ही नहीं किया इसका क्या कारण है यह बात आपको इस आर्टिकल के आगे हम आपको बताने जा रहे हैं। लेकिन आपको बता दे की सन 1970 और 80 के दशक में टीसीएस जैसी पायनियर कंपनियों ने आईटी सेक्टर के काम को शुरू किया था लेकिन सबसे मजेदार बात तब हुई जब पूरी दुनिया में Y2K के संकट आया।
यह एक समय था कि भारत की आईटी सेक्टर को आगे बढ़ने का मौका मिला लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर इसके रिसर्च और गुणवत्ता युक्त कार्य नहीं हो पाया यह बहुत बड़ी दुख की बात है। आपको फिर बता दे की Y2 के संकट में पूरी दुनिया ने भारत की तरफ देखा और यहां के सस्ते और अंग्रेजी बोलने वाले आईटी युवाओं ने दुनिया की समस्या का समाधान किया दरअसल बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत से सॉफ्टवेयर सुधरवाने लगी। अमेरिका पूरी दुनिया की कंपनियों के लिए यह फायदेमंद सौदा था क्योंकि भारत में सस्ते और बेहतरीन स्किल आईटी सेक्टर में मिल रहा था।
आईटीआई में आगे होने के बाद Ai में क्यों पिछड़ भारत
जाहिर है कि दुनिया एक ही टेक्नोलॉजी पर टिकी नहीं रहती बल्कि आविष्कार होते रहते हैं। 10 को पहले कंप्यूटर के लिए जी प्रोग्राम को बनाने के लिए बहुत समय लगता था और कई पेशेवरों वालों की जरूरत होती थी पर जमाने में करवट ली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह सब काम चुटकियों में कर देता है। जाहिर सी बात है कि भारत आईटी सेक्टर में तो आगे उभर कर सामने आया लेकिन हाई स्किल यानी आई पर उसने फोकस नहीं किया बड़ी-बड़ी कंपनियां आईटी सेक्टर के निम्न दर्जे के कार्य ही करने में अपना समय गवा दिया लेकिन रिसर्च के जरिए नहीं आने वाले टेक्नोलॉजी की तरफ ध्यान ही दी नहीं दिया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भारतीय आईटी दिग्गज क्यों पीछे गए
जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सन 2010 के समय पूरी दुनिया में सामने आने लगा उसे पर रिसर्च होने लगे तो भारत का आईटी डाइजेस्ट शुरुआती स्टेप में इससे पीछे गया लेकिन इसके पीछे का कारण स्पष्ट है कि हमारा जो फॉक्स था वह को मार्जिन सर्विस पर था कंपनियों ने रिसर्च पर पैसा खर्च नहीं किया है जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा भारत में मिल सके उनके आईटी सेक्टर के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उभर कर सामने आ सके दरअसल आईटी सेक्टर के बाद का ही चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सी था जिसमें भारत कहीं ना कहीं चूक गया जिसका कारण यह था कि सही रणनीति नहीं थी।
आपको बता दे कि उस समय कई कंपनियां अपनी कमाई का एक प्रतिशत भी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च पर खर्च नहीं करती थी। इस वजह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में भारत अमेरिका और चीन से पीछे गया।
दूसरा कारण है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है लेकिन यहां से लोग सीखने के बाद अमेरिका जैसे देश में चले जाते हैं और वहां पर बेहतर काम करते हैं। दरअसल अमेरिका में हाई क्वालिटी जीवन जीने की जगह समझ में आती है ऐसे में बुद्धिमान लोग अमेरिका में ही चले जाते हैं ऐसा कई रिसर्च से पता चला है।
इससे भारत को कोई लाभ नहीं मिलता है। यानी ब्रेन ड्रेन की समस्या सबसे बड़ा कारण भी हो सकता है इसके साथ ही यहां से पढ़े लिखे युवा जब अमेरिका में जाते हैं तो वहां पर रिसर्च हाई क्वालिटी का करते हैं जिससे कि फायदा अमेरिका को मिलता अमेरिका का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लगातार उभरता हुआ चला जा रहा है।
भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मजबूत स्थिति में है
विशेष बताते हैं कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में इन्वेस्टमेंट बेहतर तरीके से हो तो भारत का आई टैलेंट पूरी दुनिया में प्रथम स्थान पर आ सकता है दरअसल देखा जाए तो अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करने वाले लोग में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। भारत की दूसरी बेहतरीन स्थिति आई इसके पेनिट्रेशन और GitHub पर ओपन ओपन-सोर्स AI प्रोजेक्ट में मजबूत स्थिति में है।
इस बात का अंदाजा आज ऐसे लगाया जा सकता है कि हजारों भारतीय इंजीनियर गूगल माइक्रोसॉफ्ट मेट जैसी कंपनियों में अपनी भूमिकाएं निभा रहे हैं। लेकिन हम यहां बात करते हैं कि फ्रंटियर रिसर्च फाउंडेशन मॉडल में भारत बहुत पीछे है दरअसल यहां की शिक्षा व्यवस्था में भी रिसर्च जैसी चीज बहुत कम सामने आती है और इसके साथ ही आपको बता दे कि चीन और उस में पीएचडी स्तर के ज्यादा रिसर्च क्वालिटी वाले होते हैं और दूसरी चीज भारत में ब्रेन ड्रेन और डॉक्टर प्रोग्राम की बड़ी कमी है इस कारण से भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लगातार पिछड़ता चला जा रहा है।
लेकिन अगर इन सभी समस्याओं से समाधान हासिल कर लिया जाए तो मार्को पोलो ट्रैक्टर की एक बात समझ में आती है जो बताता है कि भारत ए टैलेंट के नए एक्सपोर्टर हैं लेकिन यहां पर खुद भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हक बनना चाहिए यह बात भी बहुत जरूरी है।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नई नौकरियों का धमाका मचाएगा
जैसा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के साथ पहले ही कहा जा रहा था, कई पारंपरिक नौकरियाँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। खासकर लो-स्किल वाली जॉब्स प्रभावित हो रही हैं। लेकिन साथ ही हाई-स्किल वाली नई नौकरियाँ भी तेजी से उभर रही हैं। यह तकनीकी परिवर्तन का स्वाभाविक नियम है, जिसे हम भारतीय अच्छी तरह समझते हैं।
AI से आने वाली नई नौकरियाँ
नैसकॉम (NASSCOM) और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, 2030 तक भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लगभग 3 मिलियन नई टेक्निकल जॉब्स सृजित होने की उम्मीद है। इसके अलावा, AI से जुड़ी अन्य क्षेत्रों में करीब 10 मिलियन नौकरियाँ पैदा होंगी।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निम्नलिखित होंगी:
AI इंजीनियर और प्रॉम्प्ट इंजीनियर — सबसे अधिक माँग वाली जॉब्स
- AI ऑफिसर / AI स्ट्रैटेजिस्ट
- मशीन लर्निंग (ML) स्पेशलिस्ट
- डेटा साइंटिस्ट
- AI-इनेबल्ड हेल्थकेयर टेक्नीशियन
- AI कंटेंट क्रिएटर
इसके अलावा IT, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर और फाइनेंस सेक्टर में AI से संबंधित जॉब्स की माँग बहुत तेजी से बढ़ेगी।
किन जॉब्स पर पड़ेगा असर?
हालाँकि कुछ जॉब्स प्रभावित भी होंगी। डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग, साधारण कस्टमर सर्विस जैसी लो-स्किल वाली नौकरियाँ कम हो सकती हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए स्किल अपग्रेडेशन बेहद जरूरी है। नए टूल्स, AI टेक्नोलॉजी और डिजिटल स्किल्स सीखना समय की माँग है।
लेखक की अंतिम टिप्पणी और निष्कर्ष
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निस्संदेह एक चुनौती है, लेकिन भारत के पास इसमें आगे बढ़ने के सभी जरूरी संसाधन मौजूद हैं। हमारी युवा जनसंख्या, मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और IT सेक्टर का अनुभव हमें विश्व में AI का लीडर बना सकता है।
भारत बहुभाषी देश है, इसलिए हम AI को स्थानीय भाषाओं में प्रभावी ढंग से लागू करके पूरी दुनिया के सामने खुद को लीडर साबित कर सकते हैं। IT सेक्टर की अपनी ताकत को अपग्रेड करके हम AI के क्षेत्र में नंबर 1 बन सकते हैं।
बस जरूरत है — सरकार और कंपनियों द्वारा रिसर्च और इनोवेशन पर ज्यादा निवेश की, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की। युवाओं को अपने स्किल्स को लगातार अपडेट करना चाहिए और AI से खुद को जोड़ना चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस New update
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए कई तरह के काम किया जा रहे हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा इसके लिए काम किया जा रहा है। सुखद बात यह है कि दुनिया भर की कंपनियां भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य के रूप में देख रही है।
दरअसल प्रसिद्ध विदेशी कंपनी एयरट्रंक ने भारत में करीब 3 लाख करोड रुपए के निवेश करने की योजना बनाई है। जिससे यह पांच गीगावॉट डाटा सेंटर विकसित करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। कंपनी के सीईओ रॉबिन खुदा ने यह बात कहीं की दुनिया में सबसे आकर्षक डिजिटल निवेश केंदों में से एक भारत है। इसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश भारत के डिजिटल टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाएगी इसके साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी उभरने का मौका मिलेगा।
आपको यह आर्टिकल कैसा लगा?
कमेंट करके जरूर बताइएगा, मैं हर कमेंट का जवाब दूंगा।
मैंने पहले भी AI से संबंधित कई सवालों के सरल और स्पष्ट जवाब दिए हैं। भारत में AI का प्रभाव अभी IT सेक्टर जितना गहरा नहीं पड़ा है, लेकिन आने वाले वर्षों में रिसर्च और रिपोर्ट्स के अनुसार भारत AI का ग्लोबल पावरहाउस बनने की राह पर है। इसके लिए हमें इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के क्षेत्र में और तेजी से काम करना होगा।
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