Pad Parichay: पद परिचय लेटेस्ट अपडेट नोट्स CBSE Class 10 Hindi A व्याकरण दिया गया और इसे आप पूरा जरूर पढ़ें आपकी परीक्षा के लिए बहुत ही फायदेमंद है और कठिन से कठिन प्रश्नों को यहां पर सरल ढंग से समझाया गया है जो किसी
1. शब्द और पद में अंतर
- शब्द – वर्णों का सार्थक मेल। भाषा की स्वतंत्र इकाई जिसका अर्थ होता है।
उदाहरण: राम, पत्र, पढ़ना - पद – जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के अनुसार वाक्य में प्रयुक्त हो जाता है, तब वह पद बन जाता है।
उदाहरण: - राम पत्र पढ़ता है।
- राम ने पत्र पढ़ा।
इन वाक्यों में ‘राम’, ‘पत्र’ और ‘पढ़ता/पढ़ा’ पद बन गए हैं।
पद-परिचय – वाक्य में प्रयुक्त पदों का विस्तृत व्याकरणिक परिचय देना ही पद-परिचय कहलाता है।
2. व्याकरणिक परिचय क्या बताना होता है?
वाक्य में प्रयुक्त पद विकारी है या अविकारी?
- यदि विकारी है तो उसका भेद, उपभेद, लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल तथा अन्य शब्दों के साथ संबंध।
- यदि अविकारी (अव्यय) है तो उसका प्रकार और अन्य शब्दों से संबंध।
3. पदों का परिचय देते समय क्या-क्या बताएँ?
| पद का प्रकार | क्या-क्या बताना है |
|---|---|
| संज्ञा | भेद (व्यक्ति/जाति/भाव/समूह), लिंग, वचन, कारक, क्रिया से संबंध |
| सर्वनाम | भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक, क्रिया से संबंध |
| विशेषण | भेद, लिंग, वचन, विशेष्य |
| क्रिया | भेद, लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य, धातु, कर्ता-कर्म |
| क्रियाविशेषण | भेद, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
| समुच्चयबोधक | भेद, किन शब्दों/पदों को जोड़ रहा है |
| संबंधबोधक | भेद, किसके साथ संबंध बता रहा है |
| विस्मयादिबोधक | भाव (हर्ष, शोक, विस्मय, घृणा आदि) |
4. पदों के दो मुख्य वर्ग
अ. विकारी पद
इनमें लिंग, वचन, पुरुष, कारक आदि के कारण रूप बदलता है।
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया विकारी पद हैं।
- संज्ञा
प्राणी, व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नाम।
- व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक
- द्रव्य, पदार्थ, धातु, कक्षा, सेना, भीड़ आदि जातिवाचक संज्ञा में आते हैं।
- लिंग – स्त्रीलिंग / पुल्लिंग
- कारक – संज्ञा का क्रिया से संबंध बताने वाला।
- सर्वनाम
संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द।
उदाहरण: मैं, हम, ये, कुछ आदि। - विशेषण
संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द।
उदाहरण: मीठा, परिश्रमी, काला, मोटा।
- प्रविशेषण – विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द।
उदाहरण: बहुत मीठा, अत्यधिक भयावह, बिलकुल कम।
- क्रिया
कार्य के करने या होने का बोध कराने वाले शब्द।
- धातु – क्रिया का मूल रूप। धातु + ना = सामान्य रूप (पढ़ + ना = पढ़ना)। कर्म के आधार पर:
- अकर्मक – हँसना, रोना, भागना, बैठना
- सकर्मक – पढ़ना, लिखना, खाना, देना बनावट के आधार पर:
- मुख्य क्रिया
- संयुक्त क्रिया (कर लिया, सो गया)
- प्रेरणार्थक क्रिया (लिखवाना, पढ़वाना)
- नामधातु क्रिया (फ़िल्माना, शरमाना)
- पूर्वकालिक क्रिया (पढ़कर, खाकर) काल – क्रिया होने का समय (वर्तमान, भूत, भविष्य)।
ब. अविकारी पद (अव्यय)
लिंग, वचन, काल, पुरुष का कोई असर नहीं पड़ता।
उदाहरण: प्रातः, अभी, धीरे-धीरे, उधर, यहाँ, परंतु, और, इसलिए।
अव्यय के भेद:
- क्रियाविशेषण – क्रिया की विशेषता बताते हैं।
उदाहरण: बहुत, धीरे-धीरे, उधर, प्रातः। - संबंधबोधक – संज्ञा/सर्वनाम के बाद आकर अन्य संज्ञा/सर्वनाम से संबंध बताते हैं।
उदाहरण: के पास, के सामने, के साथ, के अलावा, के भीतर, की तरह, के बाद आदि। - समुच्चयबोधक – दो शब्दों, पदबंधों या वाक्यों को जोड़ते हैं।
उदाहरण: और, तथा, किंतु, परंतु, अथवा। - विस्मयादिबोधक – आश्चर्य, हर्ष, घृणा, पीड़ा आदि भाव प्रकट करते हैं।
उदाहरण: ओह, अरे, अहा, हाय। - निपात – किसी शब्द के बाद लगकर अर्थ पर बल देते हैं।
उदाहरण: ही, तो, भी, तक, मात्र, भर।
5. प्रयोग की विशिष्टता के कारण Pad Parichayमें अंतर
| शब्द | विभिन्न रूपों में प्रयोग |
|---|---|
| और | सर्वनाम, विशेषण, क्रियाविशेषण, समुच्चयबोधक |
| अच्छा | संज्ञा, विशेषण, क्रियाविशेषण, विस्मयादिबोधक |
| कुछ | सर्वनाम, विशेषण, संज्ञा, क्रियाविशेषण |
| बहुत | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रियाविशेषण |
| ऐसा | संज्ञा, विशेषण आदि |
उदाहरण:
- औरों की बात मत कीजिए। (सर्वनाम)
- और लोग कब आएँगे? (विशेषण)
- मैं अभी और खाऊँगा। (क्रियाविशेषण)
- सुमन आई और उपहार देकर चली गई। (समुच्चयबोधक)
ये पूरे नोट्स CBSE Class 10 Hindi A के पद-परिचय अध्याय पर आधारित हैं। परीक्षा में पद-परिचय पूछने पर उपरोक्त बिंदुओं के अनुसार विस्तार से लिखना चाहिए।
Pad Parichay पर कठिन प्रश्न
अब यहां पर आपको पद परिचय पर कठिन अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न के बारे में बताने जा रहे हैं जो की हाई स्कूल की सीबीएसई बोर्ड और दूसरे स्कूल की बोर्ड परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसके अलावा कंपटीशन में भी पूछे जाते हैं पद परिचय पर कठिन प्रश्न पर हम चर्चा करेंगे। यहां पर सबसे पहले हम पद परिचय के अंतर्गत संज्ञा वाले शब्दों के पद परिचय पर बातचीत करेंगे।
संज्ञा के तीन भेद
- संज्ञा (Noun) – कठिन उदाहरण
नोट्स:
संज्ञा के भेद (व्यक्तिवाचक / जातिवाचक / भाववाचक / समूहवाचक / द्रव्यवाचक), लिंग, वचन, कारक और क्रिया से संबंध अवश्य लिखें।
कठिन बोर्ड प्रश्न:
ममता की मारी माता ने अपने घायल बच्चे को तुरंत उठा लिया।
ममता → भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंध कारक, ‘मारी’ विशेषण से संबंधित।
माता → जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘उठा लिया’ क्रिया की कर्ता।
बच्चे → जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक, ‘उठा लिया’ क्रिया का कर्म।
काशी में हज़ारों सालों का इतिहास है।
काशी → व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरण कारक।
हिमालय संसार का सबसे ऊँचा पर्वत है।
हिमालय → व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
पर्वत → जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक (पूरक)।
नीति, न्याय, सदाचार और धर्म की आप प्रत्यक्ष मूर्ति हैं।
नीति, न्याय, सदाचार, धर्म → भाववाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, संबंध कारक।
संज्ञा से आधारित कठिन अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न – जब भाववाचक संज्ञा बहुवचन हो जाती है तब यह कौन सी संज्ञा हो जाती है?
उत्तर – जब भाववाचक संज्ञा बहुवचन हो जाती है तो या जातिवाचक संज्ञा हो जाती जैसे बुराई। इसको बहुवचन बना देंगे तो बुराइयों। इस तरह से यह भाववाचक संज्ञा आप जातिवाचक संज्ञा में बदल गई।
प्रार्थना भाववाचक संज्ञा है प्रार्थनाएं बहुवचन में बदल देंगे तो यह जातिवाचक संज्ञा बन जाएगी।
हम सभी प्रार्थनाएं करते हैं कि इस धरती से पाप मिट जाए।
प्रश्न- व्यक्तिवाचक संज्ञा कब जातिवाचक संज्ञा बन जाता है?
व्यक्तिवाचक संज्ञा जब किसी जाति विशेष के लोगों के लिए कहा जाता है या किसी वर्ग की पहचान के लिए कहा जाता है तो वह जातिवाचक संज्ञा हो जाता है। जैसे – आज गुरुओं को एकलव्य जैसे शिष्यों की जरूरत है। यहां पर एकलव्य जातिवाचक के संज्ञा होगा। क्योंकि एकलव्य सभी शिष्यों के लिए या पढ़ने वालों के लिए आवाहन के तौर पर कहा गया है। इसी तरह जयचंदों के कारण ही देश हारा है। यहां पर जयचंद गद्दारी का प्रतीक है इसलिए यहां जातिवाचक संज्ञा जयचंद होगा।
प्रश्न – जातिवाचक संज्ञा कब व्यक्तिवाचक हो जाता है?
जब किसी व्यक्ति को जातिवाचक संज्ञा से उसे पुकारा जाता है तो वह व्यक्ति वाचक हो जाता जैसे पंडित जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे यहां पंडित जवाहरलाल नेहरू को कहा गया इसलिए इस वाक्य में पंडित व्यक्तिवाचक संज्ञा है। नेताजी ने आजाद हिंद की फौज की स्थापना की थी। इस बात में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कहा गया है और यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
- सर्वनाम (Pronoun) – कठिन उदाहरण
नोट्स:
भेद (पुरुषवाचक / निजवाचक / प्रश्नवाचक / संबंधवाचक / अनिश्चयवाचक), पुरुष, लिंग, वचन, कारक और क्रिया से संबंध लिखें।
कठिन बोर्ड प्रश्न:
उन्होंने देश-विदेश की काफी यात्राएँ कीं।
उन्होंने → पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, बहुवचन, कर्ता कारक, ‘कीं’ क्रिया का कर्ता।
यह पुस्तक किसकी है?
यह → निर्देशवाचक सर्वनाम / सार्वनामिक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, ‘पुस्तक’ विशेष्य।
किसकी → प्रश्नवाचक सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंध कारक।
अपनी दादी से उस समय की परिस्थितियों का पता लगाइए।
अपनी → निजवाचक सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंध कारक (दादी से संबंधित)।
जब वे यहाँ आए तभी मैं चला गया था।
वे → पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, बहुवचन, कर्ता कारक।
मैं → पुरुषवाचक सर्वनाम, उत्तम पुरुष, एकवचन, कर्ता कारक।
- विशेषण (Adjective) – कठिन उदाहरण
नोट्स:
भेद (गुणवाचक / संख्यावाचक / परिमाणवाचक / सार्वनामिक / कृदंत), लिंग, वचन, विशेष्य अवश्य लिखें। प्रविशेषण भी पूछा जा सकता है।
कठिन बोर्ड प्रश्न:
पके आम बड़े मधुर होते हैं।
पके → गुणवाचक विशेषण (कृदंत), पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य = आम।
बड़े → गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य = आम।
मधुर → गुणवाचक विशेषण / रीतिवाचक, ‘होते हैं’ की विशेषता।
द्विवेदी जी के निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच के परिचायक हैं।
दूरगामी → गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य = सोच।
खुली → गुणवाचक विशेषण (कृदंत), स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य = सोच।
मेरा भाई तीसरी कक्षा में पढ़ता है।
तीसरी → क्रमसूचक संख्यावाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य = कक्षा।
यह थैला मेरे छोटे भाई का है।
छोटे → गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य = भाई।
- क्रिया (Verb) – कठिन उदाहरण
नोट्स:
अकर्मक/सकर्मक, मुख्य/संयुक्त/प्रेरणार्थक/पूर्वकालिक, लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य, धातु, कर्ता-कर्म अवश्य लिखें।
कठिन बोर्ड प्रश्न:
शीला ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी।
हँस रही थी → अकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, अपूर्ण भूतकाल, कर्तृवाच्य, कर्ता = शीला।
माता ने अपने घायल बच्चे को तुरंत उठा लिया।
उठा लिया → सकर्मक संयुक्त क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, सामान्य भूतकाल, कर्तृवाच्य, कर्ता = माता, कर्म = बच्चे।
हम लोग रोते-चिल्लाते भाग चले।
रोते-चिल्लाते → पूर्वकालिक क्रिया / क्रियाविशेषण रूप में प्रयुक्त, पुल्लिंग, बहुवचन।
भाग चले → अकर्मक संयुक्त क्रिया, पुल्लिंग, बहुवचन, भूतकाल।
अनुराग यहाँ दसवीं कक्षा में पढ़ता था।
पढ़ता था → अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, अपूर्ण भूतकाल, कर्तृवाच्य, कर्ता = अनुराग।
- क्रियाविशेषण (Adverb) – कठिन उदाहरण
नोट्स:
भेद (कालवाचक / स्थानवाचक / रीतिवाचक / परिमाणवाचक / निषेधवाचक), जिस क्रिया की विशेषता बता रहा है, उसका उल्लेख करें।
कठिन बोर्ड प्रश्न:
जल्दी जाओ, भाई को बुला लाओ।
जल्दी → कालवाचक / रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘जाओ’ क्रिया की विशेषता।
शीला ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी।
ज़ोर-ज़ोर से → रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘हँस रही थी’ की विशेषता।
मैं रोज सुबह धीरे-धीरे चलता हूँ।
रोज सुबह → कालवाचक क्रियाविशेषण।
धीरे-धीरे → रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘चलता हूँ’ की विशेषता।
आजकल हमारा देश प्रगति के मार्ग पर बढ़ रहा है।
आजकल → कालवाचक क्रियाविशेषण, ‘बढ़ रहा है’ की विशेषता।
- अव्यय (समुच्चयबोधक, संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात)
कठिन बोर्ड प्रश्न:
अरे, तुम भी आ गए?
अरे → विस्मयादिबोधक अव्यय (आश्चर्य/संबोधन)।
भी → निपात (बल देने वाला)।
अहा! उपवन में सुंदर फूल खिले हैं।
अहा! → विस्मयादिबोधक अव्यय (हर्ष/विस्मय)।
हम बाग में गए पर वहाँ कोई आम न मिला।
पर → वियोजक समुच्चयबोधक अव्यय (दो वाक्यों को जोड़ता है)।
वहाँ → स्थानवाचक क्रियाविशेषण।
न → निषेधवाचक क्रियाविशेषण।
विद्यालय के पास बगीचा है।
के पास → संबंधबोधक अव्यय, ‘विद्यालय’ से संबंध बताता है।
सुमन आई और उपहार देकर चली गई।
और → संयोजक समुच्चयबोधक अव्यय।
परीक्षा में उत्तर लिखने की सही शैली (उदाहरण)
प्रश्न: निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित पदों का पद-परिचय दीजिए –
“रमेश तीसरी कक्षा में पढ़ता है।”
उत्तर:
रमेश → व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘पढ़ता है’ क्रिया का कर्ता।
तीसरी → क्रमसूचक संख्यावाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य = कक्षा।
कक्षा → जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरण कारक।
पढ़ता है → अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, वर्तमान काल, कर्तृवाच्य, कर्ता = रमेश।
अतिरिक्त कठिन अभ्यास प्रश्न (स्वयं हल करें):
एक आदमी लंगड़ाता हुआ चला आ रहा था।
बहस करना पिताजी का प्रिय शगल था।
हिरण अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में घूमता है।
बड़े-बड़े ओले मैदान में घास पर गिर रहे थे।
हालदार साहब कुछ पल चुपचाप से सामने देखते
भाववाचक कब बन जाती है जातिवाचक जाने
भाववाचक संज्ञा एकवचन में भाव बताती है।बहुवचन में वही शब्द जातिवाचक बन जाता है। क्योंकि तब वह विभिन्न प्रकारों का बोध कराता है।
उदाहरण देखिए: बुराई से दूर रहो।(यहाँ भाववाचक है।)बुराइयों से लड़ो।(यहाँ जातिवाचक हो गया।)
मिठास अच्छी लगती है।(भाववाचक)मिठासें अलग-अलग होती हैं।(जातिवाचक)सुंदरता सबको भाती है।(भाववाचक)सुंदरताएँ अनेक प्रकार की होती हैं।(जातिवाचक)
बुराई (भाववाचक) → बुराइयों (जातिवाचक)
दूरी (भाववाचक) → दूरियाँ (जातिवाचक)
अच्छाई (भाववाचक) – अच्छाइयां (जातिवाचक) ।
हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा में पद परिचय में इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं इनका ध्यान से करना चाहिए।
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